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पूर्व DEO और बाबुओं का कारनामा,व्याख्याता का फर्जी अवकाश स्वीकृत किया,पूर्व में पॉक्सो का है आरोपी

पूर्व DEO और बाबुओं का कारनामा,व्याख्याता का फर्जी अवकाश स्वीकृत किया,पॉक्सो का है आरोपी

संचालनालय को गुमराह कर 113 दिनों का फर्जी मेडिकल अवकाश

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शिकायत के बावजूद अब तक नहीं हुई कार्रवाई

राजनांदगांव:- पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी और कार्यालय में पदस्थ अधिकारी व कर्मचारियों और स्कूल में पदस्थ प्राचार्य व व्याख्याता ने मिलकर गलत जानकारी दी। इसके बाद दस्तावेज प्रस्तुत कर संचालनालय से 113 दिनों का चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करा लिया। इस फर्जीवाड़े की दो लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी को अब तक दी जा चुकी है, लेकिन जांच आरंभ नहीं हो पाई है। इस मामले की शिकायत करने वाले पैरेंट्स एसोसियेशन ने इस पर नाराजगी जताई है।

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0 फरारी के बाद हुए थे गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने नवपदस्थ डीईओ को जानकारी दी है कि उत्तरा लहरे जो शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, कोकपुर, विकासखंड डोंगरगांव में पदस्थ है, वह दिनांक 23 जनवरी 2023 से लेकर 15 मई 2023 तक शाला नहीं पहुंचे। उनके विरूद्ध 22 जनवरी 2023 को डोंगरगांव थाने में पॉक्सो का केस दर्ज हुआ था।

पॉल का कहना है कि, जो व्याख्याता कई महीनों तक फरार था। उसके बाद जुलाई के महीने में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। इस बीच बिना सूचना दिए वह अनाधिकृत रूप से स्कूल से अनुपस्थित था, उसका अवकाश स्वीकृत करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। बावजूद इसके उत्तरा लहरे का 113 दिनों का चिकित्सा अवकाश संचालनालय से मिथ्या जानकारी व दस्तावेज प्रस्तुत कर स्वीकृत कराया गया। जबकि शासन द्वारा जारी अवकाश नियम में यह स्पष्ट है कि, 90 दिनों से अधिक अवकाश पर रहने से मेडिकल बोर्ड द्वारा वर्क टू फिट यानि स्वास्थ्य होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, जबकि उत्तरा लहरे को 113 दिनों का चिकित्सा प्रमाण पत्र एक डॉक्टर ने जारी किया और उसी को आधार बनाकर उसे 113 दिनों का अवकाश स्वीकृत कराया गया।
0 विभाग को थी पूरी जानकारी
उत्तरा लहरे 113 दिनों तक फरार थे, अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित थे और विभाग के DEO को इसकी पूरी जानकारी थी। पॉल ने यह भी बताया कि शासन द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि कोई शासकीय सेवक यदि बिना सूचना दिए एक माह से अधिक दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो उसका अवकाश स्वीकृत नहीं किया जावे, ऐसे शासकीय सेवक के विरूद्ध तत्काल विभागीय कार्यवाही किए जाने का प्रावधान है, जबकि उत्तरा लहरे के मामले मे विभाग ने कोई विभागीय कार्यवाही नहीं किया, उसे 113 दिनों का चिकित्सा अवकाश स्वीकृत कराया गया। पॉल ने विभाग को दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत कर यह भी जानकारी दिया है कि उत्तरा लहरे को 113 दिनों का चिकित्सा अवकाश दिलाने के लिए कैसे उसकी उपस्थिति पंजी में छेड़छाड़ किया गया है, जो गंभीर प्रवृत्ति का संगठित अपराध है, जिसे जान-बुझकर सुनियोजित ढंग से किया गया है।
पैरेंट्स एसोसियेशन ने यह शिकायत करते हुए उम्मीद जताई है कि विभाग के नए डीईओ इसकी निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे।

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